Sunday, January 15, 2012

Dil-e-Darhami

सज़ा कुछ इस कदर उसने दी की गुनाह खुद कराह कर बोला !
जालिम मत कर इतना सितम बेवजह बदनाम मई हो जाऊगा !!
किया उस ने सौदा मेरी वफ़ा का सारे बाजार !
जाने अंजाने कर बैठे वो अपना ही मुक्कमल ज़रर!!
ना माहिर थे वो रिवाज़-ए-तिजारत मे वरना !
हम तो कब के बिके हुए थे उनके तबस्सुम के लिए !!

देख कर अपने इस बदहाली को दीवान-ए-मीर याद आ गये
"इस अहद मे इलाही, महब्बत को क्या हुआ
छोड़ा वफ़ा को उसने,मुरव्वत को क्या हुआ "
Ram Beer Patel


Note :
1- Darhami- Ast-vast hona
2-Zarar- nuksaan
3-Tijarat - Vyapaar
4- Tabbsum - Muskan
5- Murvvat - haya,sheel,shankoch

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